अब नहीं चढ़नी पड़ेगी 16 KM की खड़ी चढ़ाई अडानी ग्रुप ला रहा है सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे

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पहाड़ों पर अब चढ़ाई नहीं, मिलेगी उड़ान – अडानी ग्रुप ला रहा है सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे!

उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में से एक, केदारनाथ धाम, न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। हर साल भारी संख्या में तीर्थयात्री कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आते हैं। अब इस यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए Adani Group ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

परियोजना की घोषणा:

भारत की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को केंद्र सरकार की तरफ से सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे परियोजना के निर्माण और संचालन का ज़िम्मा सौंपा गया है। यह प्रोजेक्ट ₹4,081 करोड़ की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ:

विशेषताविवरण
स्थानसोनप्रयाग से केदारनाथ (उत्तराखंड)
लंबाईलगभग 13 किलोमीटर
समय की बचतवर्तमान में 6-8 घंटे की यात्रा अब 30 मिनट में
यात्रा का प्रकाररोपवे (केबल कार) – हवा में लटके केबिन से यात्रा
तकनीकी विशेषताएँमॉडर्न टेक्नोलॉजी, उच्च सुरक्षा मानक, पर्यावरण अनुकूल
यात्री क्षमताप्रति घंटे हजारों यात्री ले जाने की क्षमता
परियोजना मॉडलपब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)

क्यों ज़रूरी है यह रोपवे?

  1. आसान और सुरक्षित यात्रा: अभी यात्रियों को गौरीकुंड से केदारनाथ तक 16 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें कई बार जान का जोखिम भी होता है।
  2. बुजुर्गों और विकलांगों के लिए सहूलियत: यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं या लंबी यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं।
  3. आपातकालीन सेवाओं में मदद: आपदा के समय में (जैसे वर्षा, भूस्खलन, बर्फबारी), यह रोपवे राहत एवं बचाव कार्यों में सहायक होगा।

पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

  • केदारनाथ यात्रा अब अधिक लोगों के लिए सुलभ होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे – जैसे गाइड, होटल, टैक्सी, दुकानदार आदि।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा, जिससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।

पर्यावरण की चिंता भी

उत्तराखंड एक संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र (Eco-sensitive zone) है। ऐसे में इस परियोजना को सतत विकास (Sustainable Development) को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।

  • निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई कम से कम की जाएगी।
  • वेस्ट मैनेजमेंट और ट्रैफिक कंट्रोल की आधुनिक तकनीकें अपनाई जाएंगी।
  • सरकार की तरफ से एनवायरमेंटल क्लीयरेंस के तहत हर पहलू पर बारीकी से निगरानी रखी जाएगी।

निर्माण कब शुरू होगा?

हालांकि अभी अंतिम समय-सीमा घोषित नहीं की गई है, परंतु सूत्रों के अनुसार:

  • 2025 के अंत तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।
  • 2028 तक परियोजना के पूर्ण रूप से चालू होने की उम्मीद है।
Falguni Gaur

Falguni | Journalist by degree, media storyteller by passion Working in the legal sector Supreme Court & law firm Sharing grounded news and fresh takes on current affairs at Tazi Post.

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