भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता जारी, टैरिफ़ दबाव के बीच जयशंकर का सख़्त संदेश

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“जयशंकर का साफ़ संदेश – अगर पसंद नहीं तो मत खरीदो”

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025:
भारत और अमेरिका के बीच इन दिनों व्यापारिक तनाव चरम पर है। अमेरिका ने रूस से बढ़ते भारतीय तेल आयात को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत पर नए टैरिफ़ लगाए हैं। जहां 25% अतिरिक्त शुल्क पहले ही लागू हो चुका है, वहीं 27 अगस्त से यह दर दोगुनी होकर 50% तक पहुंच जाएगी। इन चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज स्पष्ट किया कि भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता और “रेड लाइंस” पर किसी भी हालत में समझौता नहीं करेगा।

अमेरिका का दबाव और रूस से तेल आयात का मुद्दा

रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर पश्चिमी देशों की नीतियों को चुनौती दे रहा है। अमेरिका का कहना है कि भारत को रूस पर निर्भरता कम करनी चाहिए और “प्रॉफिटियरिंग” (लाभ कमाने की नीति) छोड़नी चाहिए।

लेकिन भारत का तर्क है कि उसे अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करना है और इसके लिए वह सबसे सस्ते और भरोसेमंद विकल्प चुनेगा। रूस भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए फायदेमंद है। इसी कारण भारत ने अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से तेल आयात बढ़ाया है।

जयशंकर का कड़ा जवाब

प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने अमेरिका की आपत्तियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“अगर आपको पसंद नहीं है, तो खरीदिए मत। लेकिन भारत अपनी ऊर्जा नीति को किसी और देश की शर्तों पर तय नहीं करेगा। हमारे लिए किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों का हित सबसे ज़्यादा मायने रखता है।”

जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि भारत ने स्पष्ट “रेड लाइंस” तय की हैं। इनमें कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा शामिल है। उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ता तभी आगे बढ़ सकती है, जब इन हितों से समझौता न किया जाए।

भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध हमेशा से उतार–चढ़ाव भरे रहे हैं।

  • अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 200 अरब डॉलर से ज़्यादा का व्यापार होता है।
  • भारत अमेरिका को दवाइयाँ, आईटी सेवाएँ, कपड़े और कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से भारत मशीनरी, तकनीकी सामान और रक्षा उपकरण आयात करता है।

हालांकि, अक्सर दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद सामने आते रहे हैं।

  • 2018 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया था।
  • 2019 में अमेरिका ने भारत को “जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस” (GSP) से बाहर कर दिया, जिससे भारत को निर्यात में नुकसान हुआ।
  • अब 2025 में रूस से तेल आयात का मुद्दा नई तनातनी का कारण बन गया है।

बढ़ते टैरिफ़ का असर

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% तक के टैरिफ़ का असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। खासकर दवाइयों, स्टील और कृषि उत्पादों पर अमेरिकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस स्थिति से निपटने के लिए एशियाई और अफ्रीकी बाज़ारों पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। इसके अलावा, रूस और खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाकर भारत अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

राजनीतिक और रणनीतिक असर

यह विवाद केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक असर भी डाल सकता है।

  • अमेरिका चाहता है कि भारत उसकी “इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी” में पूरी तरह शामिल होकर चीन और रूस को चुनौती दे।
  • लेकिन भारत “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) की नीति पर चलता है, यानी वह किसी भी गुट का हिस्सा बने बिना अपने हितों के हिसाब से निर्णय लेता है।
  • यही कारण है कि भारत रूस से ऊर्जा खरीद भी जारी रखता है और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग भी बनाए रखता है।

भारत का सख़्त रुख, अमेरिका पर बढ़ता दबाव

भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता फिलहाल जारी है, लेकिन टैरिफ़ विवाद ने इसे जटिल बना दिया है। जयशंकर का “अगर पसंद नहीं, तो खरीदिए मत” वाला बयान यह साफ़ कर देता है कि भारत किसी भी दबाव में अपनी नीति नहीं बदलेगा।
भारत का रुख स्पष्ट है—उसकी प्राथमिकता जनता के हित, किसानों की सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका और भारत इस विवाद को बातचीत के ज़रिए सुलझा पाते हैं या व्यापार युद्ध और गहराता है।

Deepika Rai

I am Deepika from Bihar (Bettiah, west Champaran). I am currently pursuing my Bachelor's in Journalism and Mass communication from Dev Bhoomi Uttarakhand University, and now working as intern at TaaziPost I have a keen interest in writing, graphic design, film and media studies. Recently I have done my internship in champaran talkies ( worked on positioning actors, assisting dop, learning direction basics) My motive of doing journalism is to inform, educate, and empower people through truthful and insightful reporting, bridging the gap between information and awareness.

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