परिमल नाथवानी कौन हैं, जिनके सामने झारखंड राज्यसभा चुनाव में बिखर गया INDIA गठबंधन?

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परिमल नाथवानी की जीत से INDIA गठबंधन को झटका।

रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत ने न केवल राजनीतिक समीकरण बदल दिए, बल्कि INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर परिमल नाथवानी कौन हैं और उनकी जीत को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है।

कौन हैं परिमल नाथवानी?

परिमल नाथवानी देश के जाने-माने उद्योगपति और कॉर्पोरेट जगत की प्रमुख हस्तियों में से एक हैं। वे लंबे समय तक रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं और कंपनी में वरिष्ठ जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। मूल रूप से गुजरात से संबंध रखने वाले नाथवानी का झारखंड से राजनीतिक रिश्ता नया नहीं है। वे इससे पहले भी झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

व्यापार और उद्योग जगत में मजबूत पहचान रखने वाले नाथवानी ने झारखंड में विकास, खेल और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े कई कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी दिखाई है। यही कारण है कि राज्य की राजनीति में उनकी एक अलग पहचान बनी हुई है।

राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ?

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार के खाते में गई, जबकि दूसरी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की।

सबसे बड़ा राजनीतिक झटका कांग्रेस को लगा, जिसके उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि INDIA गठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने का दावा किया जा रहा था।

INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल

नाथवानी की जीत के बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर क्रॉस-वोटिंग और राजनीतिक असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गठबंधन पूरी तरह एकजुट रहता, तो परिणाम अलग हो सकते थे।

कांग्रेस नेताओं ने भी चुनाव परिणामों के बाद समीक्षा की बात कही है। वहीं विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल और वोट प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इस परिणाम को INDIA गठबंधन के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं।

भाजपा के लिए रणनीतिक जीत

हालांकि परिमल नाथवानी निर्दलीय उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त था। उनकी जीत को भाजपा की रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि विपक्षी गठबंधन की संख्या शक्ति होने के बावजूद राजनीतिक प्रबंधन और एकजुटता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

Falguni Gaur

Falguni | Journalist by degree, media storyteller by passion Working in the legal sector Supreme Court & law firm Sharing grounded news and fresh takes on current affairs at Tazi Post.

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