
मुंबई, 17 जून 2026। महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के विवादित बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के कुछ सांसदों के कथित तौर पर बागी तेवर अपनाने और एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की खबरों के बीच राउत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
बताया जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज़ हैं और अलग रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं। इसी संदर्भ में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने बागी नेताओं पर निशाना साधा। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद विपक्षी दलों और शिंदे गुट ने राउत की भाषा पर सवाल उठाए।
राउत ने आरोप लगाया कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं को पक्ष बदलने के लिए आर्थिक प्रलोभन भी दिए गए हैं। राउत ने इसे लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि पार्टी ऐसे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। शिंदे समर्थक नेताओं का कहना है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपनी राजनीतिक सोच के आधार पर निर्णय लेता है तो उसे “खरीद-फरोख्त” का नाम देना उचित नहीं है। उन्होंने राउत के बयान को हताशा का परिणाम बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित असंतोष और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को भी उजागर करता है। वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट के बाद पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सांसदों के संभावित असंतोष की खबरें उद्धव ठाकरे खेमे के लिए चिंता का विषय मानी जा रही हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने सांसद वास्तव में पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, संजय राउत के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े घटनाक्रम का कारण बनता है।