राजनीतिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में याद किए गए यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री
लखनऊ।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राजस्थान व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे क़ल्यान सिंह की पुण्यतिथि पर आज पूरे प्रदेश और देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की गईं। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ-साथ आम जनता ने भी उन्हें “बाबूजी” कहकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजनीति में अपने सादगीपूर्ण जीवन, जनसरोकारों के लिए लिए गए ठोस फैसलों और रामजन्मभूमि आंदोलन में निभाई गई उनकी भूमिका को आज भी लोग याद करते हैं।
योगी आदित्यनाथ का श्रद्धांजलि कार्यक्रम

आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित क़ल्यान सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा,
“क़ल्यान सिंह जी भारतीय राजनीति के एक युग थे। उनका जीवन राष्ट्र और समाज को समर्पित रहा। उन्होंने अपने कर्तव्यनिष्ठ आचरण से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया। राम मंदिर आंदोलन में उनका योगदान अविस्मरणीय है और भाजपा परिवार सदैव उनका ऋणी रहेगा।”
योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अपील की कि वे बाबूजी के आदर्शों और उनके ‘रामराज्य’ के सपनों को आगे बढ़ाएँ।
राम मंदिर आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान
क़ल्यान सिंह का नाम भारतीय राजनीति में विशेष रूप से उस दौर में चर्चा का विषय बना जब 1991 में वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय उनकी सरकार सत्ता में थी। यद्यपि यह घटना विवादित रही, परंतु हिंदुत्व की राजनीति में क़ल्यान सिंह का नाम इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो गया।
राम मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरों में से एक होने के कारण उन्हें आमजन ‘रामभक्त बाबूजी’ के नाम से याद करते हैं।
सादगी और जनता से जुड़ाव
क़ल्यान सिंह को लोग केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि जनता के सेवक के रूप में याद करते हैं। उनका रहन-सहन सादा था और वे हमेशा जनता की समस्याओं को सुनने व हल करने के लिए तत्पर रहते थे। विशेषकर किसानों, पिछड़े वर्गों और ग्रामीण अंचलों में उनकी गहरी पैठ थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी ईमानदार और कठोर प्रशासनिक छवि ने ही भाजपा को उत्तर प्रदेश में मज़बूती दी और संगठन को नई ऊर्जा प्रदान की।
मुख्यमंत्री से राज्यपाल तक की लंबी यात्रा
क़ल्यान सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर दो बार कार्यकाल निभाया। इसके अलावा उन्हें राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का राज्यपाल बनने का अवसर भी मिला। अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने भाजपा की जड़ों को मज़बूत किया और संगठन को आम जनता से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन
लखनऊ सहित अलीगढ़, अतरौली और प्रदेश के अन्य जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित कीं। मंदिरों में हवन और भजन-कीर्तन हुए, जबकि भाजपा कार्यालयों में उनके जीवन और संघर्ष पर संगोष्ठियाँ आयोजित की गईं।
परिवार और समर्थकों की उपस्थिति
श्रद्धांजलि सभाओं में क़ल्यान सिंह के परिवारजन और करीबी समर्थक भी मौजूद रहे। सभी ने उनके जीवन से जुड़ी यादों को साझा किया और कहा कि बाबूजी हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी आवाज़ बनते थे।
आदर्श और विरासत
आज उनकी पुण्यतिथि पर यह संदेश दिया गया कि क़ल्यान सिंह की राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने का एक प्रयास थी। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।