नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025
भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को लेकर ऐतिहासिक और कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सभी नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि अगले 8 हफ्तों के भीतर सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर स्थायी रूप से शेल्टर होम में भेजा जाए और किसी भी परिस्थिति में उन्हें दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जाए, चाहे वे नसबंदी (Sterilization) किए गए हों या नहीं।

यह आदेश उस समय आया है जब दिल्ली NCR में कुत्ता काटने की घटनाएं पिछले एक साल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में राजधानी में 1.25 लाख से ज्यादा डॉग-बाइट केस दर्ज हुए, जबकि NCR के गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में यह संख्या 65,000 से अधिक रही।
आदेश के मुख्य बिंदु
- 8 हफ्तों की समयसीमा: दिल्ली NCR से सभी आवारा कुत्ते हटाए जाएं।
- दोबारा रिहाई नहीं: पकड़े गए कुत्तों को किसी भी हालत में सड़क पर न छोड़ा जाए।
- शेल्टर होम्स की व्यवस्था: पर्याप्त जगह, स्टाफ, CCTV, मेडिकल सुविधा और रिकॉर्ड सिस्टम अनिवार्य।
- 24×7 हेल्पलाइन: कुत्ता काटने की शिकायत और रेस्क्यू के लिए आपातकालीन नंबर जारी किया जाए।
- जन-जागरूकता: रेबीज़ टीकाकरण केंद्रों की सूची, पोस्टर और मीडिया प्रचार।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई: आदेश में बाधा डालने वालों पर अवमानना कार्यवाही होगी।
आदेश का कानूनी आधार
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिक मानते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि “सड़क पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों से नागरिकों का सुरक्षित रहना मुश्किल हो गया है। सरकार का कर्तव्य है कि वह लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करे।”
क्यों आया यह आदेश?
- लगातार बढ़ते डॉग-बाइट केस: दिल्ली के कुछ इलाकों में तो रोज़ाना दर्जनों लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं।
- रेबीज़ का खतरा: WHO के अनुसार, भारत में हर साल 20,000 से ज्यादा मौतें रेबीज़ के कारण होती हैं, जिनमें ज्यादातर आवारा कुत्तों के काटने से होती हैं।
- शिकायतों की बाढ़: सुप्रीम कोर्ट को हजारों चिट्ठियां और जनहित याचिकाएं मिलीं, जिनमें सड़कों पर दौड़ते कुत्तों और बच्चों-बुजुर्गों पर हमलों की घटनाओं का उल्लेख था।
विरोध और विवाद

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पशु अधिकार संगठनों और एनिमल लवर्स ने कड़ा विरोध किया है।
- PETA इंडिया ने आदेश को “अव्यवहारिक, तर्कहीन और अवैध” करार दिया। उनका तर्क है कि सड़क से कुत्तों को हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और इससे जानवरों को पीड़ा होगी।
- FIAPO ने चेतावनी दी कि इससे “वैक्यूम इफ़ेक्ट” पैदा होगा, यानी खाली जगह पर नए कुत्ते आ जाएंगे जिससे समस्या फिर से बढ़ सकती है।
- कई कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट और जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
प्रशासन की तैयारी
दिल्ली नगर निगम और NCR के अन्य निकायों ने आदेश को लागू करने के लिए योजना बनानी शुरू कर दी है।
- 50 से अधिक अस्थायी डॉग शेल्टर की पहचान।
- मोबाइल रेस्क्यू वैन और डॉग-कैचिंग टीम की तैनाती।
- रेबीज़ टीकाकरण कैम्प का विस्तार।
जनता की राय
- समर्थन: कई लोग मानते हैं कि यह आदेश बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
- विरोध: पशु प्रेमियों का कहना है कि सरकार को पहले स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन प्रोग्राम मजबूत करना चाहिए था।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न सिर्फ दिल्ली NCR की सड़कों की तस्वीर बदल सकता है बल्कि देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की नीति पर भी असर डाल सकता है। अब यह देखना होगा कि 8 हफ्तों में प्रशासन इस चुनौती को कितनी कुशलता से संभाल पाता है और क्या यह फैसला वाकई कुत्ता काटने की घटनाओं को कम करने में सफल होता है या नहीं।