नमस्कार साथियों, कुछ महीनों पहले तक जब हम बिहार में बैठकर जलवायु परिवर्तन (climate change) की खबरें पढ़ते थे, तब हमें लगता था कि हमें इससे क्या मतलब, लेकिन आज पूरा बिहार जलवायु परिवर्तन के मार से त्रस्त है। कहीं गाँव डूब रहे हैं तो कहीं लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है।
लेकिन आज के इस आर्टिकल (article) में हम सिर्फ भू-जल (groundwater) की समस्या पर बात करेंगे और यह भी देखेंगे कि कैसे भू-जल को फिर से रिचार्ज (recharge) कर हम अपनी आने वाली पीढ़ी को इस समस्या से बचा सकते हैं।
उत्तर बिहार में भू-जल की समस्या
सबसे पहले तो मैं आपको बता दूँ कि इन दिनों उत्तर बिहार के कई जिलों में भू-जल सूखने की समस्या आ रही है। जबकि इन्हीं जिलों में पिछले साल बाढ़ (flood) की स्थिति थी, तो ऐसा कैसे हो गया कि मात्र एक साल में इन जिलों में भू-जल की समस्या आ पड़ी? इसका पता लगाने पर मुझे पता चला कि उत्तर बिहार के इन जिलों से बाढ़ का पानी बहते हुए आगे के जिलों में चला जाता है और यहाँ जल जमा नहीं होता, और जो कुछ भी जल जमा होता है उसे जमीन के अंदर उस स्तर (level) तक पहुँचने में सालों लग जाते हैं जहाँ से पानी पंप (pump) व अन्य माध्यम से निकाले जा रहे हैं।
इन जगहों पर यदि जनता के द्वारा भू-जल पुनर्भरण (groundwater recharge) का प्रयास नहीं किया गया तो स्थिति और भी भयावह होती चली जाएगी, तो चलिए जानते हैं कि हम आम लोग अपनी तरफ से क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं।
भू-जल पुनर्भरण के लिए जनता द्वारा किए जा सकने वाले प्रयास
तो साथियों, अब जब हमने समस्या समझ ली है, तो आइए अब देखते हैं कि हम अपनी जमीन और अपने बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। ये कोई मुश्किल काम नहीं है, बस थोड़ी सी समझ और मेहनत की जरूरत है।
1. छत के पानी को जमीन में उतारें (Rooftop Rainwater Harvesting)
ये सबसे आसान और असरदार तरीका है। हमारी छतों पर जो बारिश का पानी गिरता है, वो ऐसे ही नालियों में बहकर बर्बाद हो जाता है। अगर हम इस पानी को इकट्ठा करके सीधे जमीन में डाल दें, तो हमारी जमीन फिर से पानी से भर सकती है।
- कैसे करें?
- अपनी छत से एक पाइप लगाकर पानी को सीधे एक छोटे गड्ढे या रिचार्ज पिट (recharge pit) में ले जाएं।
- इस गड्ढे में फिल्टर (filter) के लिए पत्थर, रेत और बजरी की परतें डाल दें, ताकि पानी साफ होकर नीचे जाए और जमीन में गंदगी न फैले।
- अगर आपके पास खाली बोरवेल या कुआँ है, तो पानी को साफ करके पाइप के जरिए सीधे उसमें उतार दें।
- अपनी छत से एक पाइप लगाकर पानी को सीधे एक छोटे गड्ढे या रिचार्ज पिट (recharge pit) में ले जाएं।
- सावधानी:
- पानी हमेशा साफ होना चाहिए। अगर पानी गंदा होगा तो जमीन के अंदर की परतें चोक हो जाएंगी और पानी नीचे नहीं जा पाएगा।
- पानी को बहुत तेज़ी से जमीन में न डालें। एक साथ ज़्यादा पानी डालने से जमीन धंसने (land subsidence) का खतरा हो सकता है। पाइप के आखिर में एक बाल्टी या जाली लगाकर पानी को धीरे-धीरे जमीन में जाने दें।
- पानी हमेशा साफ होना चाहिए। अगर पानी गंदा होगा तो जमीन के अंदर की परतें चोक हो जाएंगी और पानी नीचे नहीं जा पाएगा।
2. पुराने कुएँ और बोरवेल का करें इस्तेमाल (Rejuvenating Old Wells and Borewells)
हमारे गाँवों में बहुत से पुराने कुएँ और बोरवेल होते हैं जो सूख गए हैं और इस्तेमाल नहीं हो रहे। इन्हें बेकार समझने की गलती न करें, ये हमारे काम आ सकते हैं।
- कैसे करें?
- छत के पानी या वर्षा से किसी अन्य जगह पर जमा हुई साफ पानी के स्रोत (जैसे पोखर या तालाब का साफ पानी) को फिल्टर करके सीधे इन कुओं और बोरवेल में डालें।
- बोरवेल में पानी डालने के लिए खास तरह के रिचार्ज शाफ्ट (recharge shaft) या पाइप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- छत के पानी या वर्षा से किसी अन्य जगह पर जमा हुई साफ पानी के स्रोत (जैसे पोखर या तालाब का साफ पानी) को फिल्टर करके सीधे इन कुओं और बोरवेल में डालें।
- सावधानी:
- पानी को सीधे कुएँ या बोरवेल में फेंकने की बजाय, एक पाइप के ज़रिए नीचे तक ले जाएँ, ताकि पानी सतह पर तेज़ी से न गिरे और ज़मीन को नुकसान न हो।
- सुनिश्चित करें कि कुएँ या बोरवेल में कोई कचरा या गंदगी न जाए।
- पानी को सीधे कुएँ या बोरवेल में फेंकने की बजाय, एक पाइप के ज़रिए नीचे तक ले जाएँ, ताकि पानी सतह पर तेज़ी से न गिरे और ज़मीन को नुकसान न हो।
3. पोखर और तालाबों की अहमियत समझें (Importance of Ponds)
हमारे गाँवों में पुराने समय से ही पोखर और तालाब होते थे। ये सिर्फ नहाने या जानवरों को पानी पिलाने के लिए नहीं थे, बल्कि ये हमारी जमीन को पानी पिलाने का सबसे बड़ा ज़रिया थे।
- क्यों ज़रूरी हैं?
- तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा होता है। यह पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता रहता है और भू-जल को रिचार्ज करता है।
- ये आसपास के इलाकों के भू-जल स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- तालाबों के सूखने से भू-जल का रिचार्ज बंद हो जाता है, जिससे पीने के पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है।
- तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा होता है। यह पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता रहता है और भू-जल को रिचार्ज करता है।
- क्या करें?
- अपने गाँव के पुराने तालाबों और पोखरों को साफ रखें और उनकी खुदाई करवाएं ताकि उनकी गहराई बढ़े और उनमें ज़्यादा पानी जमा हो सके।
- तालाबों के चारों ओर पेड़ लगाएं, ये मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी को साफ रखने में मदद करेंगे।
- गाँव के लोग मिलकर इन तालाबों की देखभाल करें और उन्हें सूखने न दें।
- अपने गाँव के पुराने तालाबों और पोखरों को साफ रखें और उनकी खुदाई करवाएं ताकि उनकी गहराई बढ़े और उनमें ज़्यादा पानी जमा हो सके।
कुछ और बातें, जिनका ध्यान रखें:
- पानी का सही इस्तेमाल: सिर्फ रिचार्ज करना ही काफी नहीं है, हमें पानी का समझदारी से इस्तेमाल भी करना होगा। बेवजह पानी बर्बाद न करें।
- जागरूकता फैलाएं: अपने आस-पड़ोस के लोगों, दोस्तों और रिश्तेदारों को भी इन तरीकों के बारे में बताएं। जब सब मिलकर काम करेंगे, तभी बदलाव आएगा।
- सरकारी मदद: अगर ज़रूरत पड़े तो समय-समय पर सरकार को भी भू-जल पुनर्भरण (groundwater recharge) की व्यवस्था करने के लिए जगाते रहे।
केंद्रीय भूमिजल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट : https://cgwb.gov.in/
याद रखिए, ये जमीन हमारी है और इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी। अपनी मिट्टी को पानी दें, ताकि वो हमें जीवन दे सके।