“अगर पलायन सिर्फ़ गरीब करते तो सबसे ज़्यादा पलायन महादलित क्यों नहीं करते?

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सबसे ज़्यादा पलायन महादलित क्यों नहीं करते

“इस सवाल ने बिहार के जातिगत पलायन को लेकर अब तक की सबसे बड़ी बहस को जन्म दिया है। इस बहस की शुरुआत की न्यूज़ हंटर की एक रिसर्च रिपोर्ट ने, जिसमें उन्होंने बिहार जातिगत जनगणना 2023 के पलायन संबंधी डेटा को आधार बनाकर यह बताया कि सबसे अधिक पलायन बिहार से उच्च जातियों द्वारा किया जाता है, न कि दलित या महादलित वर्गों द्वारा।

न्यूज़ हंटर की रिपोर्ट में क्या था?

जाति (उदाहरण)पलायन %
ब्राह्मण (GEN)9.23%
कायस्थ (GEN)7.48%
राजपूत (GEN)7.37%
भूमिहार (GEN)6.68%
कुर्मी (OBC)5.61%
यादव (OBC)2.98%
मुसहर (SC)2.25%
पासी (SC)1.6%
दुसाध (EBC)2.7%

यानी GEN जातियों का पलायन औसतन 7% से अधिक, जबकि SC वर्गों का औसत पलायन 2.7% के आसपास है। यह एक मिथक को तोड़ता है कि सिर्फ़ गरीब या हाशिए पर खड़े समुदाय ही पलायन करते हैं।

हमारी टीम की रिसर्च में क्या सामने आया?

हमने राज्य और केंद्र सरकार की रिपोर्टों को खंगाला, जिनमें वर्षों से बिहार के पलायन के ट्रेंड को दर्ज किया गया है। यहाँ कुछ मुख्य आंकड़े दिए जा रहे हैं:

साल दर साल बिहार से पलायन (सरकारी डेटा पर आधारित)

वर्षअनुमानित पलायन संख्यास्रोत / रिपोर्ट
2001~1.2 करोड़NSSO रिपोर्ट
2011~2.0 करोड़जनगणना
2016~2.8 करोड़बिहार श्रम विभाग
2021~3.2 करोड़CMIE रिपोर्ट
2023~3.5 करोड़ (अनुमान)जातीय जनगणना 2023

इनमें से अधिकतर श्रमिकों के साथ-साथ छात्र, पेशेवर और नौकरीपेशा वर्ग भी शामिल हैं।

खास बात यह है कि ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार जैसे वर्गों में शिक्षा व रोज़गार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों की ओर पलायन तेज़ी से बढ़ा है।

मुख्य कारण जो हमारी रिसर्च में उभरे:

  1. शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट — विशेषकर मेडिकल, इंजीनियरिंग व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बिहार से बाहर जाना मजबूरी।
  2. रोज़गार के अवसरों की कमी — उद्योगों और निजी क्षेत्र का अभाव।
  3. सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव — उच्च जातियों में “अभिभावकीय दबाव” कि बच्चों को बिहार से बाहर भेजा जाए।
  4. राजनीतिक हाशिये की भावना — कुछ वर्ग खुद को बिहार की सामाजिक सत्ता संरचना से दूर मानते हैं।

हमारे निष्कर्ष:

  • बिहार में जातीय असमानता के आधार पर नहीं, बल्कि अवसरों की अनुपलब्धता के आधार पर पलायन हो रहा है।
  • GEN वर्ग के लोग, जो किसी समय सत्ता व सामाजिक व्यवस्था के केंद्र में रहे, आज सबसे ज़्यादा पलायन कर रहे हैं।
  • महादलित, EBC, और SC वर्ग की तुलना में ये आंकड़ा दो गुना या उससे अधिक है।

न्यूज़ हंटर को क्रेडिट

इस पूरी बहस और नए विमर्श की शुरुआत न्यूज़ हंटर ने की, जिन्होंने जातिगत जनगणना डेटा के आधार पर एक मजबूत सामाजिक-सांख्यिकीय विश्लेषण प्रस्तुत किया।

हमारी टीम ने उनके काम को आगे बढ़ाते हुए सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों से उसकी पुष्टि की, और पाया कि बिहार में पलायन सिर्फ़ गरीबी का परिणाम नहीं है, बल्कि यह “सपनों और अवसरों” की तलाश की कहानी है।

अंतिम बात:

बिहार में विकास और नीतियों की समीक्षा करते समय यह समझना होगा कि पलायन का चेहरा बदल चुका है। अब यह सिर्फ श्रमिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और अफसर बनने का सपना देखने वाले उच्च जातियों के युवा भी राज्य से बाहर जा रहे हैं।

क्या बिहार इस ‘ब्रेन ड्रेन’ को रोकने के लिए तैयार है?

स्रोत: न्यूज़ हंटर, जातीय जनगणना 2023, श्रम विभाग रिपोर्ट, CMIE, NSSO

Taazi Post

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